Author: Breakupeye

बुरांश का फूल .

चुरा कर लाया हूँ इसे परियों के शहर से,पहाड़ों की डगर से, ख्वाबों की महक से।यह वो नगीना है, जो नसीबों में भी नहीं,दिखाई देता है, पर किसी की नजर में नहीं।यह अनमोल है, पर हाथों की लकीरों से परे है,कोई चाहता है इसे, तो कोई देखे चुप...

Read More

बादल

वाह बादल तूने क्या काम किया है,,,बेवजह मुझे परेशान किया है,,फैला कर अपनी जुल्फें,,,दोपहर को ही शाम किया...

Read More

समान नागरिक संहिता (संस्कृति की रंगत)

संस्कृति की रंगत, परंपरा का मान,क्या एक कागज़ में बाँधोगे पहचान?हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,हर दिल की अपनी एक परछाई। संस्कृति की जड़ें, आस्था का आधार,  काट देगा क्या ये सब, एक कैंची का वार?   रीति-रिवाजों की...

Read More

जय भीम जय भारत बाबा साहब अंबेडकर जयंती 2025

जो गूंगे थे सदियों से, तूने उन्हें बोलना सिखाया।मंदिरों से जो निकाले गए, तूने उन्हें संसद में बैठाया,हर आँख में सपना और हर दिल में तूने अधिकार लेखा था।शोषण की उस भीड़ में, तूने इंसान देखा था, …न जात-पात की रेखाएँ, न...

Read More

कौन कहता है आसमां ज़मीं से मिलते नहीं.

कौन कहता है आसमां ज़मीं से मिलते नहीं,चलो कहीं दूर, किसी मोड़ पर चल के देखें।चंद ख्वाब आँखों में,कुछ हौसले साथ हों,राहों में रोशनी हो,नज़ारे भी ख़ास हों।हवा से कहेंगे,ज़रा रुख बदल के चले,बादलों से कहेंगे,ज़मीं पर पिघल के...

Read More