
काश मैं लिख पाता क्या है कहानी,
काश तुम समझ पाती, जो मैंने कभी कहा ही नहीं।
हर शब्द जो होंठों पर ठिठक गया,
हर भावना जो आँखों में सिमट गया।
साँसों की सरगम में उलझे जो बोल,
दिल की हलचल में छुपे अनगिनत मोड़।
समझने की कोशिश में गुज़रे कई साल,
पर अनकहे जज़्बात रह गए बेहाल।
काश कोई शाम होती, जब चुप्पी कहती,
जो ज़ुबान न कह पाई, वो आँखे सहती।
जो दर्द हवा में गूंजकर थम गया,
काश कोई उसे महसूस कर लेता।
लबों पे रुकी थी हर एक दास्ताँ,
दिल की गहराई में छुपी थी एक जुबां।
हर मुस्कान के पीछे एक साया था,
हर खामोशी में दर्द का साया था।
जो पलकों से बह न सका,
वो अश्क बन के भीतर ही समाया था।
मैंने चाहा तुम्हें बिन कहे,
तुमने समझा नहीं, शायद सुने बिन रहे।
वो लम्हे जो साथ थे गुज़रे,
अब बस यादों के पर्दे में सिसकते हैं धीरे-धीरे।
अब भी जब रातें चुपचाप आती हैं,
तेरी वो बातें दिल को रुला जाती हैं।
तन्हा सन्नाटों में बस एक तुझी को ढूंढता हूँ,
तेरे बिना अधूरा, खुद से ही झूठा झगड़ता हूँ।
वो ख्वाब जो हमने संजोए थे कभी,
अब टूटे आईनों से झलकते हैं तभी।
जब कोई तेरी याद दिला देता है,
या कोई तेरे जैसा मुस्कुरा देता है।
काश एक पल को ही सही,
तू लौट के आए और कहे—”मैं तो यहीं था कहीं”।
मैं फिर से बिखरने को तैयार हूँ,
अगर तू फिर से समेटने को बेकरार है कहीं।
फिर चलें वहीं, जहां वक्त थम गया था,
जहां हर एहसास तुझसे जुड़ गया था।
ना शिकवा कोई, ना गिला होगा,
बस तेरा मेरा फिर से सिलसिला होगा।
मैं फिर से तुझमें खुद को पाऊँ,
तेरी खामोशी में भी सब कुछ सुन जाऊँ।
तेरी आँखों में जो कहानियाँ छुपी हैं,
उन्हें अपने लफ्ज़ों से सजाऊँ, जी लूं, सुनाऊँ।
चल, इस बार अधूरी ना रहे बात कोई,
ना रह जाए दिल में छुपी कोई सौगात कोई।
जो कह ना सके थे, वो अब कह जाएँ,
तेरी मेरी कहानी को फिर से जी जाएँ।
काश मैं बयाँ कर पाता वो जज़्बात,
जो दिल में छुपे, बिना लफ़्ज़ों के साये,
काश तुम सुन पाती वो ख़ामोशी,
जो हर साँस में बुनती है एक अनकही बातें,
तेरी आँखों में ढूँढता हूँ वो जवाब,
जो मेरे सवालों से परे है कहीं,
काश मैं रुक पाता उस पल में,
जब दिल ने तुझसे कुछ कहा ही नहीं।
वाह क्या बात है, क्या जज्बात है,,