आज फिर से एक शाम गुजर गया,
उदास रंगों में घुला सवेरा था।
हवा ने कुछ किस्से कहे,
पर दिल ने उन्हें अकेले ही सहे।
राहों में बिखरी यादें पुरानी,
धुंधले सपनों की कुछ कहानी।
चांदनी ने आंसू समेटे,
तारों ने फिर भी हंसकर देखे।
इस शाम का क्या मलाल करें,
नयी सुबह के गीत निकाल करें।
फिर से कोई सपना बुना जाएगा,
आज फिर से एक शाम गुजर गया,
मन के पन्नों पर एक कहानी छोड़ गया।
सन्नाटे में खोए उन यादों के साये,
हर लम्हा अब अधूरा सा रह गया।
धूप से सिसकी उठते ख्याल आए,
छोटे-छोटे अरमाँ फिर से तड़प आए।
नज़रों में बिखरी कुछ बेबाक बातें,
दिल की गलियों में धीरे-धीरे समा जाएँ।
मगर अँधेरे में भी उमड़ती है आशा,
हर टूटे सपने में छुपी है नई सुबह की लाज।
चल उठ, फिर से रच ले अपनी दास्ताँ,
क्योंकि हर शाम देती है जीने की वजह आज।
आज फिर से एक शाम गुजर गया,
पर इस बीते लम्हे में एक उजाला भी धड़क गया।
हर याद की फुसफुसाहट में छिपा है सफर,
जो फिर से जीने की राह में नया अरमान जग गया।
